पेरियार ई. वी. रामासामी नायकर:जीवन दर्शन
अखिल भारतीय नाग संघ के तत्वाधान में दिनांक 4 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10 बजे से पेरियार जयंती का आयोजन महर्षि भारद्वाज बाबा रामदास किशोर इंटर कॉलेज व आईटीआई भैरोपुर बड्डूपुर जनपद गाजीपुर उत्तर प्रदेश मैं पेरियार जयंती का आयोजन किया गया जिसमें डॉक्टर जी सिंह कश्यप ने पेरियार के जीवन दर्शन पर निम्नलिखित विचार प्रस्तुत किये पेरियार ईरोड वेंकट रामासामी नायकर (ई. वी. रामासामी), जिन्हें लोकप्रिय रूप से "पेरियार" कहा जाता है, आधुनिक भारत के प्रमुख सामाजिक सुधारकों, तर्कवादी विचारकों और जाति-विरोधी आंदोलनों के नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने सामाजिक असमानता, जातिगत भेदभाव, अंधविश्वास और धार्मिक रुढ़ियों के विरुद्ध जीवनभर संघर्ष किया। उनका मुख्य उद्देश्य समाज में समानता, आत्मसम्मान, तर्कशीलता और मानव स्वतंत्रता को स्थापित करना था।
जीवन संघर्ष - पेरियार ईरोड बेंकट नायकर रामासामी का जन्म 17 सितम्बर 1879 को तमिलनाड के ईरोड शहर मे हुआ था। पढाई में मन कम लगने के चलते पिता के काम में हाथ बंटाने लगे परन्तु बहुतायत जनमानस की सामाजिक, शैक्षिक एवं भेदभावपूर्ण स्थिति के कारण उनका मन उद्वेलित रहता था । अन्ततः 25 साल की उम्र में सन्यासी बन कर घर छोड दिया और वाराणसी की पवित्र धार्मिकता को देखने पहुंच गये जहां उनको सामाजिक बिषमता के कारण न रहने की जगह मिली और न खाना। 1925 में उन्होंने आत्मसम्मानआंदोलन (Self-Respect Movement) प्रारंभ किया।
सामाजिक आंदोलन एवं वैज्ञानिक चिंतन
सामाजिक जीवन - 1907 से 1919 के बीच में ईरोड म्युनिसिपैलिटी के अलावा अन्य 29 संस्थानों में विभिन्न पदों पर रहे। 1919 में कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के साथ ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। लेकिन 6 साल के कार्यकाल में उन्होंने महसूस किया कि कांग्रेसी नेतृत्व जाति व्यवस्था को नष्ट करने, सब को समानता का अवसर दिलाने और सामाजिक न्याय के प्रति सचेत नहीं है, यहां तक कि वायकोम (केरल) के मन्दिर प्रवेश का आन्दोलन तथा चेरन्मादेवी गुरुकुल में हो रहे भेदभाव के प्रश्न पर मतभेद हुआ तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ही छोड दिया ।
वैदिक-विरोधी आंदोलन - पेरियार ने समाज में मौजूद उन धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं की आलोचना की जिन्हें वे जातिगत असमानता और सामाजिक ऊँच-नीच का आधार मानते थे। उनका तर्क था कि जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति निर्धारित नहीं होनी चाहिए। वे जाति-व्यवस्था और जन्म-आधारित श्रेष्ठता के कट्टर विरोधी थे, जिसके लिए उन्होंने आजीवन आंदोलन चलाया।
आत्मसम्मान आंदोलन - कांगेस छोडने के पश्चात उन्होंने अपने लक्ष्य पर सारा ध्यान केन्द्रित करके जाति-व्यवस्था का नाश, सामाजिक व्यवस्था का उन्मूलन और अवसरों की समानता को बढावा देने पर कार्य करने के लिए आत्मसम्मान के आन्दोलन (Self Respect Movement) को स्थापित किया जो उनके जीवन का महत्वपूर्ण एवं निर्णायक कदम साबित हुआ। पेरियार के वैदिक-विरोधी आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम आत्मसम्मान आंदोलन था। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपने जीवन में किसी भी प्रकार की सामाजिक रत हीनता स्वीकार न करें। उन्होंने आत्मसम्मान विवाह (Self-Respect Marriage) को बढ़ावा दिया, जिसमें पुरोहित और अनिवार्य धार्मिक कर्मकांड के स्थान पर वर-वधू की समानता और स्वतंत्र सहमति को महत्व दिया जाता था। उन्होंने शिक्षा, महिलाओं की स्वतंत्रता, विधवा पुनर्विवाह और सामाजिक समानता का समर्थन किया तथा जातिगत भेदभाव के विरुद्ध व्यापक जनजागरण किया।
सामाजिक समानता का आंदोलन
उन्होंने जस्टिस पार्टी के साथ समन्वय करके सामुदायिक प्रतिनिधित्व को शिक्षा एवं रोजगार में लागू करने के लिए आक्रामक आन्दोलन चलाया जिसके परिणाम स्वरूप इस मुद्दे को जस्टिस पार्टी ने 1929 में Communal GO के माध्यम से लागू किया।
सामुदायिक प्रतिनिधित्व और प्रथम संविधान संशोधन -शिक्षा और रोजगार में सामुदायिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा और नारी के उत्थान का मामला पेरियार को जान से भी ज्यादे प्यारा था। जब 1929 से लागू Communal G O पर में मद्रास हाइकोर्ट ने 1950 में रोक लगायी जिसको सुप्रीमकोर्ट ने भी सही माना था तो पेरियार के नेतृत्व में सामाजिक न्याय की शक्तियां लामबंद हो गईं और कामराज के समर्थन से दक्षिण भारत के राज्यों में हलचल मच गई जिसके दबाव के कारण कमजोर वर्गों के हित संरक्षण के लिए स्वतन्त्र भारत के संविधान में प्रथम संशोधन करते हुए निम्नलिखित खण्ड (clause) जोडा गया-
Article(15)(4):Nothing in this article or in clause(2) of Article(29) shall prevent the state from making any special provision for the advancement of any socially and educationally backward classes of citizens or for the scheduled casts and scheduled tribes.
वैज्ञानिक चिंतन- पेरियार के विचारों का एक प्रमुख आधार तर्कवाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण था। वे किसी भी दावे को केवल परंपरा, धार्मिक अधिकार या सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि मनुष्य को प्रश्न पूछने, प्रमाण खोजने और तर्क के आधार पर निष्कर्ष निकालने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। वे अंधविश्वास, चमत्कारवाद और अवैज्ञानिक मान्यताओं की आलोचना करते थे।
द्रविडियन आन्दोलन की नींव
1937 के चुनाव के बाद जब मद्रास प्रेसीडेंसी की कमान राजा जी के हाथ में आयी तो कुछ भाषाई विवाद के चलते पेरियार ने पुनः तीब्र आन्दोलन चलाया जिससे द्रविड आन्दोलन की नींव पड़ी परिणाम स्वरूप द्रविड कझगम (DK) नामक सामाजिक- सांस्कृतिक संगठन के रूप में एक ऐतिहासिक संस्था ने जन्म लिया, जिसकी परिणीति के रूप में हम आज भी देखते हैं कि तमिलनाडु के राजनैतिक परिदृष्य पर पक्ष या विपक्ष दोनों में द्रविड आन्दोलन की छाप दिखाई देती है।
विदेश भ्रमण - पेरियार ने अनेक देशों का भ्रमण किया जिसमें सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, रसिया, फ्रान्स एवं इंग्लैंड प्रमुख हैं। इतना ही नहीं नाग-बौद्ध विरासत के प्रतिनिधि के रूप में वर्मा में आयोजित तथागत के 2500वीं जयन्ती उत्सव में सम्मलित होने का गौरव भी उनको प्राप्त है।
पत्रकारिता को बढावा - अपने आन्दोलनों के सन्देशों को जन जन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अनेकों पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन किया। जैसे-
1925: Kudi Arasu ,1927: Dravidan ,1928: Revolt in English ,1933: Pratchett ,1934: Pahuththarivul ,1935: Pahuththarivu.(monthly) आदि
जीवन सार
पेरियार ई. वी. रामासामी नायकर का जीवन सामाजिक समानता, आत्मसम्मान, तर्कवाद और मानव स्वतंत्रता के संघर्ष का उदाहरण है। उन्होंने जातिगत भेदभाव और जन्म-आधारित सामाजिक श्रेष्ठता का विरोध किया तथा लोगों को रूढ़ियों और अंधविश्वासों पर प्रश्न उठाने के लिए प्रेरित किया। उनका आत्मसम्मान आंदोलन दक्षिण भारत के सामाजिक सुधार आंदोलनों में अत्यंत प्रभावशाली रहा। उनके वैज्ञानिक चिंतन का मूल संदेश था कि मनुष्य को तर्क, प्रमाण, विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर जीवन और समाज को समझना चाहिए। सामाजिक समानता, जाति-विरोध, महिला अधिकार और तर्कशीलता के प्रश्नों पर उनके विचारों ने आधुनिक भारत के सामाजिक विमर्श को गहराई से प्रभावित किया।
साथियों, अगर हम अपनी विरासत को बचाये रखना चाहते हैं तो हमें उपरोक्त मार्ग पर चल कर ही अपनी मंजिल प्राप्त करनी होगी इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
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