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Wednesday, 18 December 2013

डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर का ओबीसी समुदाय को क्या प्रदान है

जो ओबीसी तथागत बुध्ध, संत कबीर और महात्मा जोतिबा फुले को नहीं जानता उस के लिए भारत के राष्ट्रिय नेता डो. बाबा साहेब आम्बेडकर को जानना, समजना और मानना मुश्किल है. मानवता के उत्थान के लिए जो कार्य तथागत बुध्ध, संत कबीर और महात्मा जोतिबा ने किया, वोही कार्य डो.बाबासाहेब ने आगे बढाया था. एक बड़ा भ्रम ओबीसी समुदाय के बुध्धिजिवियो और पढ़े-लिखे शिक्षितों में फैला हूवा है कि, डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर अछूत मानी गई महार जाती में जन्मे थे इसलिये उन्होंने दलित-एससी समुदाय के उत्थान लिए ही कार्य किया किया है. वास्तव मे डो बाबा साहेब आम्बेडकर हमारे राष्ट्रीय नेता थे. इस भ्रम फेलने के पीछे मिडिया का बड़ा रोल है और जिसके हाथ में सार्वजनिक पुस्तकालयों का कारोबार रहा है, ऐसे उच्च वर्ण जातियों के संचालको का भी बड़ा रोल है, क्योकि ऐसे पुस्तकालयों में डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर के जीवनचरित्र कि किताबे उपलब्ध नहीं कराइ जाती थी. किताबे पढने का मुज़े शोख होते हुवे भी डॉ. बाबा साहेब का जीवन चरित्र पढने को नहीं मिला था. 1991 में मुझे "मंडल आयोग रिपोर्ट" की हिंदी किताब मिली, जिसका प्रकाशन बामसेफ संगठन ने किया था. 1991 में डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर की जीवनी की दो किताबे पढने में आयी और पता चला की आधुनिक विश्व के एक महान पुरुष के बारे में मुझे पर्याप्त जानकारी नहीं थी. आज 2013 में भी ओबीसी के बुध्धिजिवियो और शिक्षितों को ये पता नहीं है कि बाबा साहेब ने ओबीसी समुदाय के लिए क्या किया है ? हम देखेंगे कि, बाबा साहेब ने ओबीसी समुदाय, जिस की देश में 54% से भी अधिक जनसँख्या है उसके उत्थान के लिए क्या किया है? (1) 1928 में बोम्बे सरकार ने स्टार्ट कमिटी नियुक्त कि थी जिसमे डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर ने Other backward caste यानि कि OBC शब्द का उपयोग किया था. स्टार्ट कमिटी में बाबा साहेब ने कहा था कि, जो जातिया अपर कास्ट और बेकवर्ड के बिच में आती है ऐसी जातियां अन्य पिछड़ी जाति यानी कि OBC-ओबीसी है. (2) देश की संविधान सभा में सिर्फ 6 ही ओबीसी सदस्य थे. जिसकी आवाज ब्राह्मण सदस्यों ने दबा कर रख दी थी लेकिन डॉ. बाबा साहेब के कारण ही कलम 340 का प्रावधान करना पडा और जिनके फलस्वरूप "काका कालेलकर आयोग" (1953-55) तथा "मंडल आयोग" (1978-80) की रचना केन्द्र सरकार को करनी पड़ी थी. दोनों आयोग ओबीसी के लिए थे लेकिन अफसोसजनक है की ओबीसी समुदाय के 99% शिक्षितों को इसके बारे में पता नहीं है. (3) 1951 में अपने कानून मंत्री पद से इस्तीफा देते हुवे पत्र में बाबा साहेब ने इस्तीफा का दूसरा कारण ओबीसी जातियों के लिए आयोग की नियुक्ति नहीं करना और ओबीसी की उपेक्षा करना बताया था. क्या ओबीसी के संवैधानिक अधिकारों को लागु करने के लिए 1947 से 2013 तक राज्य या केन्द्र सरकार के कोई मंत्री ने इस्तीफा दिया है ? डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर के इस्तीफा के कारण ही दबाव में आकर नहेरू सरकार को ओबीसी के लिए "काका कालेलकर आयोग" की रचना करनी पड़ी थी. 1952 की लोकसभा में 52% से ज्यादा ओबीसी-समुदाय के सांसदों सिर्फ 4.39% ही थे. बाबासाहेब ही थे जिन्होंने ओबीसी(शुद्र), एससी-एसटी(अति शुद्र) और महिलाओं के उत्थान के किया आजीवन संघर्ष किया था. उनको दलितो के उद्धारक के रूप में सिमित कार देना क्या एक षडयंत्र नहीं है ? 14-एप्रिल के दिन डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर की जन्म जयंती आती है उसमे ओबीसी जातियों के बुध्धिजिवियो और शिक्षितों को अवश्य सामिल होना चाहिए. क्यों की बाबा साहेब एक सच्चे भारतीय राष्ट्रवादी थे जिन की उपेक्षा हम अगर राष्ट्रवादी और मानवतावादी है तो नही कर सकते.

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