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Thursday, 16 November 2023

साम्यक कंप्यूटर सेंटर का हुआ शुभारम्भ

पी जी कॉलेज चौराहे पर जयप्रकाश के सुपुत्र और और उनकी पत्नी ने साम्यक कंप्यूटर सेंटर खोलने का काम किया है जिसमे कंप्यूटर के विभिन्न डिप्लोमे एम सर्टिफिकेट कोर्स प्रारम्भ किया गया ।उसके उदघाटन के अवसर पर मैंने वहाँ पहुँचकर उनका मनोबल बढ़ाया

Wednesday, 15 November 2023

बुद्ध के मार्ग पर चलने की प्राथमिकता हो, न कि बौद्ध कहलाने की।

बौद्ध धर्म के प्रचारको को एक बात जरूर ध्यान में रखने की आवश्यकता है बुद्ध ने अपने उपासको को, ना ही भिक्खुओ को कभी बौद्ध कहा है, न ही बुद्धिष्ट कहा है; परन्तु बाद में अतीत के, व वर्तमान के बुद्ध उपासकों को "विश्व", बौद्ध व बुद्धिष्ट कहने लग गया है। इसने विश्व में एक श्रेष्ठ समाज का स्वरूप ले लिया है। 
इसी प्रकार बुद्ध के मार्ग पर चलने की प्राथमिकता हो, न कि बौद्ध कहलाने की। बुद्ध के मार्ग पर चलने वाले को स्वत: ही बौद्ध कहा जाने लगेगा। घड़ी का पैंडुलम धार्मिकता की ओर हो, न कि बौद्ध कहलाने की ओर हो। व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्धारण आचार- विचार से होता है, न कि नामकरण से। अभी तक का बौद्धों का सारा जोर बौद्ध होने पर रहा है, धार्मिकता पर नहीं रहा। यह दृष्टिगत चूक है। 
गोयनका जी का व ओशो जी का जोर धर्म के मार्ग पर रहा है, न कि धर्म (धर्म परिवर्तन) पर... यही एक अंतर है।
*लोग कहते हैं कि यदि जातियां खत्म करनी है तो बौद्ध बन जाओ इस पर मेरा सवाल होता है कि  सर्टिफिकेट वाले बौद्ध या पूजा-पाठ वाले बौद्ध?*
  *यदि बौद्ध बनकर भी शादियाँ अपनी ही जाति मे ही करनी है तो फिर जातियाँ कैसे खत्म होगी ? जबकि बौद्धो मे जातियाँ होती ही नही है* 
*आखिर हम धम्म की व्यावहारिकता को स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से तैयार क्यों नहीं है?*

भारतीय संविधान की मूल भावना को लागू करवाना अनिवार्य

बामसेफ राष्ट्रीय मूलनिवास संघ एव भारतीय भीम सेना का उत्तर प्रदेश राज्य अधिवेशन दिनाँक 13 नवंबर 2023 को प्रातः 11 बजे से अलगू  कॉलेज आजमपुर (चकिया) आज़मगढ़ में संम्पन हुआ जिसमें डॉ जी सिंह कश्यप मुख्यअतिथि के रूप में शामिल हुए जिसमे संविधान की मूल भावना सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में एक व्यक्ति एक मूल्य की स्थापना को प्रस्थापित करना अनिवार्य है 

Tuesday, 14 November 2023

श्री मुरली मनोहर टाउन डिग्री कॉलेज में एम एस-सी कृषि आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विषय मे थीसिस मूल्यांकन और मौखिकी संचालन -बाह्य परीक्षक प्रोफेसर जी. सिंह


 दिनाँक 10 नवंबर 2023 को मुरली मनोहर टाउन डिग्री कॉलेज में एम एस-सी कृषि आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विषय मे थीसिस मूल्यांकन और मौखिकी संचालन किया जिसमें  बाह्य परीक्षक प्रोफेसर जी. सिंह आंतरिक परीक्षक डॉ ओमप्रकाश सिंह, डॉ बृजेश सिंह और विभाग के कर्मचारी  उपस्थित रहे सभी छात्रों की उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामनाएं दी गयी 

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के 27 वे दीक्षांत समारोह में विद्या परिषद के सदस्य के रूप में शामिल हुए प्रोफेसर जी सिंह




9 नवंबर 2023 को  वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 27 वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल एवं पीयू की कुलाधिपति आनन्दी बेन पटेल ने अपने सम्बोधन में विश्वविद्यालयों में शिक्षा की सुचिता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षक नियमित क्लास लें। विश्वविद्यालयों में जब प्रवेश, परीक्षा और परीक्षाफल की तिथि निर्धारित हो जाएगी तो शिक्षा व्यवस्था अपने आप सुधर जाएगी। महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में 73 फीसदी लड़कियां और 27 फीसदी लड़के गोल्ड मेडल पाएं हैं। इससे साबित होता है कि महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। मैंने उत्तर प्रदेश में नौ विश्वविद्यालयों की कुलपति महिलाओं को बनाया।
      उन्होंने कहा कि शोध के क्षेत्र में हमे विशेष जोर देने की जरूरत है। पेटेंट न होने के कारण विश्व के अन्य देश हमसे आगे हो जा रहे हैं। उन्होंने जर्मनी को उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गर्भवती माताओं को शिक्षा दी जाती है ताकि उसका बच्चा पैदा होने के बाद शिक्षित और संस्कारित बने। इस काम का प्रमाण हमारे यहां महाभारत काल का अभिमन्यु है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के डिग्रियों को डिजिलॉकर में रखने का एकमात्र उद्देश्य यह है कि उसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो पाए और साथ में ही वह इसके माध्यम से अपनी डिग्री को देश में कहीं से भी देख सकेंगे। इस अवसर पर कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को गिनाया
           उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों को तकनीकी के क्षेत्र में विद्यार्थियों का भी उपयोग करना चाहिए जिससे कि विश्वविद्यालय के विकास में उनकी भी सहभागिता हो। उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए विश्वविद्यालयों को आंगनबाड़ी केंद्रों तक भेजा गया। प्रदेश में वृक्षारोपण कराने का उद्देश्य भी पर्यावरण को सुरक्षित करना है। हमें समस्याओं के मूल को पहचानना होगा और प्रयास करके इसका निदान करना होगा। दीक्षांत उद्बोधन में मुख्य अतिथि पीपल्स वर्ल्ड कमीशन ऑन ड्राउट एंड फ्लड, स्वीडन एवं तरुण भारत संघ, राजस्थान के चेयरमैन जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने शिक्षा और विद्या के अंतर को समझाते हुए कहा कि शिक्षा पढ़ाई से होती और विद्या खुद लेनी पड़ती है।
         उन्होंने कहा कि शिक्षा को विद्या नीति की ओर ले जाने की जरूरत है। वैश्विक रूप से हमारे समक्ष अनेक पर्यावरण संबंधी समस्याएं परिलक्षित हो रही हैं। इन समस्याओं का मुख्य कारण विकास की होड़ में प्रकृति की अनेदखी एवं पर्यावरणीय असंतुलन है। उन्होंने कहा कि धरती का पेट तेजी से खाली हो रहा है। जल, जीवन और जमीन तीनों पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि ज्ञान-विज्ञान, सेवा और सद्भावना की जो विद्या इन युवाओं ने इस विश्वविद्यालय में ग्रहण की है, उसे जीवन में उतार कर व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन को समृद्ध एवं राष्ट्र के लिए सकारात्मक और सृजनात्मक योगदान करें।
       उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने गोल्ड मेडल पाने वाले विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें अच्छा इंसान बनने का संकल्प लेना होगा जिससे वह अपने घर परिवार के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारियों को निभा सके। विद्यार्थियों की सेवा और प्रेम उन्हें पूर्ण बनाता है। ऐसे लोग अपनी क्षमता और कौशल से देश को मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र उसके ब्रांड अंबेसडर होते हैं। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने मुख्य अतिथि, राज्यपाल और अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को बिन्दुवार बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिये मेरे मन मस्तिष्क में एक संकल्प है इसे चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित करना मेरी प्राथमिकता है। दीक्षांत समारोह की शुरुआत में शोभायात्रा निकाली गई, जिसका नेतृत्व कुलसचिव महेंद्र कुमार ने किया।
      शोभायात्रा में अतिथियों के साथ कार्य परिषद् एवं विद्या परिषद के सदस्य शामिल हुए। दीक्षांत समारोह का संचालन डॉ. मनोज मिश्र ने किया। इसके पूर्व जल भरो कार्यक्रम जल भरो गीत के साथ किया गया। दीक्षांत समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के महंत अवेद्यनाथ संगोष्ठी भवन में किया गया था। इस अवसर पर कुलाधिपति एवं राज्यपाल उत्तर प्रदेश आनंदीबेन पटेल ने सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले स्नातक एवं स्नातकोत्तर मेधावियों को 81 स्वर्ण पदक प्रदान किए।
       दीक्षांत समारोह में राज्यसभा सदस्य सीमा द्विवेदी, एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंसु, डा. रागिनी सोनकर, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह, प्रो. बीबी तिवारी, प्रो. मानस पांडेय, प्रो. वंदना राय, प्रो. अजय प्रताप सिंह, डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित, प्रो. रणंजय सिंह, प्रो. शम्भूराम चौहान, प्रो. श्रीश सिंह, डॉ. राजेश सिंह, , प्रो. अविनाश पाथर्डीकर,   डॉ. अवधेश नारायण राय, डॉ सत्यप्रकाश, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. राजेश शर्मा, वित्त अधिकारी उमाशंकर, परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंहडा.  विजय सिंह,  डा. राहुल सिंह, प्रो.जी.सिंह  प्रो. एके श्रीवास्तव, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. रामनारायण,  प्रो. देवराज सिंह, प्रो. बीडी शर्मा,  डा. संदीप सिंह, डा. प्रदीप कुमार,  डा. मनीष गुप्ता, पूर्व एनएसएस समन्वयक प्रो. राकेश यादव, रोवर्स रेंजर्स डा. जगदेव,  डा. विजय तिवारी, डा. संतोष कुमार,.  डा. सुनील कुमार,  डा. दिग्विजय सिंह राठौर,डा. रशिकेस,  डॉ. अनु त्यागी, डा. जाह्नवी श्रीवास्तव,  डा. अमरेंद्र सिंह, डा. आशुतोष सिंह, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर, महामंत्री रमेश यादव, डॉ. अमित वत्स., उप कुलसचिव अमृतलाल,  एआर अजीत सिंह,  बबिता सिंह,  दीपक सिंह,  आदि शिक्षक और कर्मचारी मौजूद थे।
 इस अवसर पर गतिमान पत्रिका का हुआ लोकार्पण
विश्वविद्यालय के 27 वें दीक्षांत समारोह में गतिमान वार्षिक पत्रिका का विमोचन राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने किया। इस पत्रिका में विश्वविद्यालय के वर्षभर की गतिविधियां स्वर्ण पदक धारकों की सूची, अतिथियों का परिचय समेत विश्वविद्यालय की विविध गतिविधियों को बड़े आकर्षण ढंग से प्रकाशित किया गया है। विमोचन अवसर पर कुलपति, दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि, प्रधान संपादक डॉ. मनोज मिश्र, संपादक डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, सम्पादन मण्डल में  प्रो. अजय द्विवेदी,  डॉ. सुनील कुमार,  डॉ. नितेश जायसवाल और डॉ लक्ष्मी मौर्य रहें।
जल संरक्षण एवं सम्वर्धन हेतु हुआ एमओयू
  पीपल्स वर्ल्ड कमीशन ऑन ड्राउट एंड फ्लड, स्वीडन एवं तरुण भारत संघ, राजस्थान के चेयरमैन जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने महंत अवेद्यनाथ संगोष्ठी भवन में जल संरक्षण एवं सम्वर्धन हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किया।
बच्चों को राज्यपाल के हाथों मिला उपहार
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 27 वें दीक्षांत समारोह में प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कक्षा 5 से 8 में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल बैग, फल, जमेटरी बाक्स, महापुरुषों पर प्रकाशित पुस्तकें आदि प्रदान किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए कुकड़ीपुर. देवकली, सुल्तानपुर एवं जासोपुर गांव में आयोजित खेल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले चार बच्चों को भी दीक्षांत समारोह राज्यपाल के हाथों पुरस्कार मिला।
रामनरेश को मिला अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक
विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के एम.ए. जनसंचार विषय में सर्वोच्च अंक पाने वाले विद्यार्थी को अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक दिया जाता है। वर्ष 2023 में एम.ए. जनसंचार विषय में सर्वोच्च अंक पाने पर रामनरेश को यह पदक मिला।
  वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 27 वें दीक्षांत समारोह में प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 80 मेधावियों को प्रथम प्रयास में अपने विषय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर 81 स्वर्ण पदक प्रदान किया। स्नातक स्तर  पर 23 एवं परास्नातक स्तर पर 58 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिला।
      222 शोधार्थियों को मिली पीएच.डी. की उपाधि
दीक्षांत समारोह में 222 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि मिली। इसमें 144 कला संकाय में, विज्ञान संकाय  में 22, कृषि संकाय में 05, शिक्षा संकाय में 34, विधि संकाय में 04, इंजीनियरिंग संकाय में  01, वाणिज्य संकाय में 09, प्रबन्ध संकाय में 02, अनुप्रयुक्त समाज विज्ञान एवं मानविकी संकाय में 01 शोधार्थियों को उपाधि मिली।
      राज्यपाल के हाथों दस आंगनबाड़ी केंद्रों को दिया किट
दीक्षांत समारोह में प्रदेश की राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने गोद लिए गए गांव में एवं अन्य जगह स्थापित दस आंगनबाड़ी केंद्रों पर ट्राइसिकल, झूला, स्टोरी बुक, व्हाइट बोर्ड, कुर्सी समेत कुल 77 सामान की किट वितरित की गई।
     बटन दबाते ही डीजी लॉकर में अपलोड हुईं डिग्रियां
दीक्षांत समारोह में प्रदेश की राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने आईपैड का बटन दबाकर 2022-23 की स्नातक और स्नातकोत्तर की एक लाख 62 हजार 687 डिग्रियों को डिजीलॉकर में अपलोड कर शुभारंभ किया। विद्यार्थियों को इससे डिजीटल डिग्री आसानी से मिल जाएगी।
    हैलीपेड पर कुलपति समेत अधिकारियों ने किया स्वागत
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के हैलीपैड पर राज्यपाल सुबह पहुंची। इस दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह, जिलाधिकारी अनुज झॉ, पुलिस अधीक्षक डॉ अजय पाल शर्मा, रजिस्ट्रार महेंद्र कुमार, समेत कई अधिकारियों ने पुष्प भेंट किया।  
अटल बिहारी वाजपेयी ग्रामीण विकास संस्थान का उद्घाटन
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने आए डॉ राजेंद्र सिंह ने दीक्षांत समारोह के पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी ग्रामीण विकास संस्थान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कुलपति, कुलसचिव, वित्त अधिकारी, प्रो.मानस पांडेय, डॉ सुनील कुमार, डॉ. श्याम कन्हैया सिंह, अमित वत्स आदि उपस्थित थे।


Friday, 10 November 2023

लहरी सिंह कश्यप कहते थे कि जीवन मे श्रद्धा का बहुत बड़ा महत्व होता है- चौधरी राजबीर सिंह

लहरी पुर गांव बसाने वाले लहरी सिंह कश्यप जी के दसवें स्मृति दिवस 12 अक्टूबर 2023 को लहरीपुर गाँव मे  हुई वैचारिक संगोष्टि को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय किसान यूनियन के अध्यक्ष चौधरी राजबीर सिंह ने लहरी सिंह के विचार दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लहरी सिंह कहते थे कि जीवन मे श्रद्धा का बहुत बड़ा महत्व होता है।

       लहरी सिंह ने अपने प्रवचनों में कहा था कि जहां पर  हमारी भावनाएं गहराई से जुड़ी हुई हो, जिन चीजों के प्रति हमारे मन में गहरी आस्था एवं विश्वास हो तथा उनके प्रति हमारी रुचि रहती हो, वही श्रद्धा होती है। श्रद्धा एक तरह से हमारे व्यक्तित्व का आधार है वह हमारी भावनाओं का केंद्र भी है क्योंकि इसी के इर्द-गिर्द हमारा जीवन संचालित होता है। हम अपनी श्रद्धा के अनुरूप ही किसी भी चीज के प्रति अपनी रुचि- झुकाव प्रदर्शित करते हैं। श्रद्धा के अनुसार ही हमारी चिंतन शैली और विचार बनते- बिगड़ते रहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हमारी प्रवृत्ति व्यवहार आहार- विहार हमारी श्रद्धा के अनुसार ही होते हैं। श्रद्धा किसी भी चीज के प्रति हो सकती है, इसके बल पर ही हम उसे क्षेत्र में लगातार बढ़ते रहते हैं, अभ्यास करने से यह श्रद्धा बढ़ती है और अभ्यास के दौरान यदि किसी भी प्रकार का इससे लाभ मिलता है, तो हमारी श्रद्धा और भी गहरी हो जाती है, वहीं लगातार किसी भी प्रकार की हानि से हमारी श्रद्धा घटती रहती है इसीलिए जो नृत्य एवं गायन के प्रति श्रद्धा रखते हैं, वह भांति-भांति से नृत्य करना सीखते  हैं उसमें अपनी महारत भी हासिल करते हैं, यदि किसी व्यक्ति की रुचि व्यसनों के प्रति होती है, तो वही कड़वी और बदबूदार चीजे उसे अत्यंत प्रिय लगने लगती है।

      कहने का तात्पर्य यह है कि श्रद्धा के अनुसार ही व्यक्ति अपने लिए कार्यक्षेत्र का चुनाव करता है, यदि उसकी श्रद्धा अच्छी चीजों के प्रति है, तो उसका व्यक्तित्व सुविक्षित होता है यदि उसकी श्रद्धा बुरी चीजों के प्रति है तो उसका व्यक्तित्व विकृत होता है। अच्छी चीजों के प्रति रुचि होने के कारण व्यक्ति अपने जीवन में पुण्य संपदा अर्जित करता है। बुरी चीजों या निम्न कोटि की चीजों के प्रति श्रद्धा होने से व्यक्ति अपने जीवन में पाप संपदा अर्जित करता है। इसीलिए हमें अपनी श्रद्धा के चुनाव के प्रति बड़ा सजग रहना चाहिए जिससे हम समाज के लिए एक उदाहरण भी बन सके तभी हमारा जीवन सार्थक हो सकता है। 

                    लहरीसिंह कश्यप ,लहरीपुर ,शामली ।

Tuesday, 3 January 2023

राष्ट्र माता सावित्री बाई फुले जी की जयंती पर कोटि कोटि नमन

राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले की  जयंति"*_पर
*"देश की प्रथम महिला शिक्षिका को नमन"*
*"महिला सशक्तिकरण की मूर्ति को प्रणाम"*
*"विधवाओं व बालिकाओं की पैरोकार"*
*"गरीबों व अनाथों की अभिभावक"*_
*"महान समाजसेवी व विद्वान लेखिका"*
*"के 03.01.1831-10.03.1897 के जीवन"*
की परोपकारी गौरवशाली जीवनगाथा"*
संघर्षों का इतिहास विपरित परिस्थितियों व विकट समस्याओं की पथरीली पगडंडियों पर सफलतापूर्वक चलकर ही लिखा जा सकता है....

देश के मूलनिवासियों के विरूद्ध अत्याचारों और साजिशों का दौर भारत में विदेशी आर्यों यानि ब्राह्मणों के आगमन से ही शुरू होता है....

पराजित प्रजा को गुलाम बनाने के लिए उनके मानवाधिकार छीनकर उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित करके असहाय और कमजोर बना दिया जाता है और ऐसा ही भारत के द्रविड़ों यानि मूलनिवासियों के साथ हजारों सालों से होता आ रहा था और वर्तमान में भी अनेकों स्थानों पर आज भी बदस्तूर जारी है....

जिस असमानता और अन्याय वाले पेशवाई ब्राह्मणवादी दौर में ब्राह्मण कथित शूद्रों को लिखने-पढ़ने, अच्छा रहने-पहनने, पक्के मकानों में रहने, सड़क पर चलने का अधिकार नहीं था और जाति के आधार पर गले में हांडी व कमर में झाडू बांधकर चलना पड़ता था, ऐसे बदमाश और बदमिजाजी पेशवाई कुशासन में शूद्रों का जीवन नारकीय था....

विदेशी आर्य अर्थात ब्राह्मण उस अमानवीय दौर में कुनबी, कोईरी, तेली, कहार, ग्वाला, माली, बढ़ई, लोहार, सोनार, ठठेरा, कसेरा, योगी, ततवा, तमोली आदि सभी पिछड़ी जातियों को शूद्र कहते थे। जिस दौर में सारे श्रमजीवी, खेतिहर मजदूर, गौपालकों की यह दुर्गति थी, तब उस दौर में लड़कियों और औरतों की दुर्गति की तो कोई सीमा ही नहीं थी....

पेशवाइयों का कानून बहुत बर्बरतापूर्ण था जो शूद्रों के साथ-साथ महिलाओं के विरूद्ध भी था। परिवार में पुत्री का जन्म होना अशुभ माना जाता था। स्त्रियों को दोयम दर्जे का दर्जा दिया जाता था। कन्या परिवार का भार समझी जाती थी। परिवार में कन्या के जन्म होते ही उसके विवाह करने की चिंता हो जाती थी। 09 वर्ष तक की आयु तक लड़की की शादी करनी पड़ती थी। धर्म शास्त्रों के अनुसार स्त्री को शिक्षित करना सामाजिक अपराध था। किसी भी स्थिति में स्त्री व शूद्र को ज्ञान नहीं देना और शिक्षित नहीं करने की कुत्सित व्यवस्था थी।

उस दुर्दांत काल में महाराष्ट्र राज्य के सतारा जिले के खंडाला तहसील के नयागांव में माली जाति के खांडोजी नेवसे पाटिल के परिवार में राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले का जन्म 03 जनवरी, 1931 को हुआ था। उनके जन्म पर परिवार में खुशियां जबरदस्त मनाई गई थी।

माता सावित्रीबाई फुले के पिताजी पेशवाई शासन में कार्य करते थे और इसी कारण पेशवाइयों का आदेश मानना उनकी मजबूरी थी। इसी मजबूरी के कारण माता सावित्रीबाई फुले की शादी महान क्रांतिकारी, समाजसुधारक और विद्वान शिक्षक महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ में सन् 1940 में मात्र 09 साल की आयु में कर दी गई।

*शिक्षा :----* माता सावित्रीबाई फुले को उनके पति महात्मा ज्योतिबा फुले ने मिट्टी व बालू रेत पर लिख-लिखकर शिक्षित किया था।

*परिवार से निष्कासन :----* महात्मा ज्योतिबा फुले द्वारा अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को पढ़ाने का ब्राह्मणों ने कड़ा विरोध किया और महात्मा ज्योतिबा फुले के पिताजी गोविंदराव फुले पर अपने पुत्र को पत्नी व महिलाओं को शिक्षित नहीं करने का दबाव बनाया, परंतु महात्मा ज्योतिबा फुले इसके लिए तैयार नहीं थे और अंततः महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले को घर से बाहर निकाल दिया गया।

*विद्यालय व महाविद्यालय :----* पेशवाई काल में 90% जनता मानसिक गुलाम थी और 95% जनता अशिक्षित थी जिन्हें शिक्षा का कोई अधिकार नहीं था। सावित्रीबाई फुले ने अपनी सहेली फातिमा शेख के साथ मिलकर पहला कन्या विद्यालय खुला जिसमें 6 छात्राओं का प्रवेश हुआ। इसके बाद एक-एक करके माता सावित्रीबाई फुले ने कन्याओं के लिए 18 विद्यालय और महाविद्यालय खोले तथा पति-पत्नी दोनों ने मिलकर कुल 71 विद्यालय में महाविद्यालय खोलें।

*नि:शुल्क शिक्षा :----* इनके द्वारा खोले गए सभी विद्यालयों व महाविद्यालयों में छात्र छात्राओं को निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था की गई।

*अपमान व तिरस्कार :----* कट्टरपंथी ब्राह्मणों को सावित्रीबाई फुले के द्वारा महिलाओं को शिक्षित करना बिल्कुल भी रास नहीं आ रहा था, इसीलिए उन्होंने सावित्रीबाई फुले का अपमान व तिरस्कार करने के लिए महिलाओं व नासमझ लोगों को भड़काया गया। जब सावित्रीबाई फुले स्कूल जाया करती थी, तो रास्ते में महिलाएं उन्हें गालियां देती थी, अपशब्द बोलती थी, उनके ऊपर गोबर, राख, धूल, गंदा पानी फेंका करती थी जिसके कारण सावित्रीबाई फुले के कपड़े गंदे हो जाते थे और स्कूल जाकर अपने साथ ले जाने वाली दूसरी साड़ी पहना करती थी। एक बार ब्राह्मणों में दो युवकों को सावित्रीबाई फुले को पीटने के लिए भेजा, तो सावित्रीबाई फूले ने उन युवकों का जबरदस्त मुकाबला किया और उनकी पिटाई करके उनको भगा दिया।

*प्रथम प्रसूति ग्रह व अनाथालय :----* सन् 1853 में देश में प्रथम प्रसूति व अनाथालय खोलने का श्रेय भी माता सावित्रीबाई फुले को ही जाता है। रूढ़िवादी परंपराओं के कारण बच्चियों की शादी बचपन में ही कर दी जाती थी। बाल विवाह के कारण समाज में बाल विधवाएं बहुत हुआ करती थी। पेशवाई युवक उन लड़कियों के साथ में जबरदस्ती संबंध बनाकर उन्हें गर्भवती कर दिया करते थे जिसके कारण वे गर्भवती महिलाएं या तो अपना गर्भपात करवाती थी और यदि गर्भपात कराने में असफल हो जाती थी, तो ऐसी स्थिति में आत्महत्या कर लिया करती थी। इन्हीं विषम परिस्थितियों से महिलाओं को उभारने के लिए माता सावित्री बाई फुले ने प्रसूति गृह व अनाथालय की व्यवस्था की थी जिसमें गर्भवती महिलाएं अपने बच्चों को जन्म देकर छोड़ जाया करती थी और फिर उन बच्चों की देखभाल महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई दोनों मिलकर किया करते थे।

*रात्रि पाठशाला :----* जब माता सावित्री बाई का ध्यान गरीब मजदूर और उनकी औरतों की ओर गया, तो उन्हें शिक्षित करने के लिए माता सावित्रीबाई फुले ने पुणे के मोहल्लों में रात्रि पाठशाला एक खोली और गरीब मजदूरों और उनके परिवार की महिलाओं को पढ़ाने का काम किया।

*अछूतों के लिए कुआं खुदवाया :----* घनघोर छुआछूत के कारण शूद्रों को कुआं तालाब और पोखर से पानी लेना अपराध था। उनके छूने से कुआं या तालाब या पोखर का पानी अपवित्र हो जाता था। ऐसा करने पर शूद्रों को मार दिया जाता था। इस भय के कारण वो लोग कुओं, तालाबों व पोखरों से पानी लेने की हिम्मत नहीं करते थे। शूद्र कुआं, तालाब या पोखर पर अपना घड़ा लेकर बैठे रहते थे। कोई दया करके उनके घड़ों में पानी डाल देते थे, तब वह पानी पीते थे या अपने बच्चों की प्यास बुझाते थे। पानी के अभाव में शूद्र प्यास से मरने के लिए विवश हो जाते थे। कुएं के पानी के अभाव में अछूत किसी गंदे खड्डे से पानी लेकर पी लेते थे, तब वे बीमार होकर मर जाते थे। ऐसी विकराल स्थिति ब्राह्मणों ने नियम बनाकर कर रखी थी। इस नरकभरी जिंदगी से बचाने के लिए माता सावित्रीबाई फुले ने शूद्रों के लिए एक कुआं खुदवाया, जहां से वे अपने लिए पीने का पानी भर सकते थे।

*बाल विवाह पर रोक लगाई :----* धार्मिक परंपराओं के कारण बच्चियों का 09 वर्ष की आयु तक विवाह कर दिया जाता था जिसके कारण उनका शरीर विवाह योग्य पूरी तरह से विकसित नहीं होता था और बच्चियां मौत के ग्रास में चली जाती थी। इस त्रासदी को देखकर सावित्रीबाई फुले ने बाल विवाह पर रोक लगाने का आंदोलन किया और उसमें वह सफल हुई।

*पुनर्विधवा विवाह शुरू किया :----* ब्राह्मणों ने यह भी धार्मिक परंपरा बना रखी थी कि बालकों का विवाह 10 वर्ष की आयु तक कर दिया जाए। इस कारण कई बालक छोटी उम्र में ही मौत के मुंह में चले जाया करते थे और बचपन में शादी होने के कारण बालिकाएं बहुत बड़ी संख्या में विधवा हो जाया करती थी। इस परंपरा का विरोध करते हुए माता सावित्रीबाई फुले ने विधवा का पुनर्विवाह कराने का आंदोलन किया और विधवाओं को पुनर्विवाह करने का अधिकार दिलवाया।

*महान नर्स :----* वर्ष 1876-77 में पुणे शहर जबरदस्त अकाल की चपेट में आ गया था। सावित्रीबाई फुले व महात्मा ज्योतिबा फुले की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, फिर भी दोनों ने अकाल का सामना करने की ठानी और धनी लोगों से धन व अन्न मांगकर पीड़ितों को राहत पहुंचाने का संकल्प लिया। इस संकल्प के बाद में दोनों पति-पत्नी धनाढ्य लोगों से अन्न व धन लेकर अकाल क्षेत्र में जाकर राहत सामग्री बांटते थे। इन्होंने अकाल पीड़ितों के लिए 52 राहत शिविर भी बनाए थे।

*शराब नहीं पीने का आंदोलन :----* शराब के कारण समाज की दुर्गति को माता सावित्रीबाई ने करीब से देखा था और इस शराब की लत को छुड़ाने के लिए माता सावित्रीबाई ने महिलाओं के साथ मिलकर आंदोलन चलाया और उनके पुरुषों और बच्चों को समझाया जिसके कारण हजारों की तादात में लोगों सावित्रीबाई फुले के कहने में शराब पीना छोड़ दिया था।

*ब्राह्मणवादी विवाह पद्धति का विरोध :----* महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने ब्राह्मणों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए शूद्रों को ब्राह्मणों से विवाह संस्कार कराने के लिए मना किया। उनसे किसी भी प्रकार के संस्कार कराने के लिए मना किया। उन्होंने विवाह में किसी भी संस्कृत के मंत्र का पढ़ने पर रोक लगाई। उन्होंने मुहूर्त के बिना किसी भी निर्धारित तारीख को शादी करनी पर जोर दिया। उन्होंने ब्राह्मणों से विवाह करवाने के लिए रोक लगाई। उन्होंने विवाह में मांसाहार नशापन का विरोध किया।

*महान लेखिका :----* माता सावित्रीबाई फुले ने 06 साहित्य सर्जन किया और काव्य रचना भी की। उनके द्वारा सृजित साहित्य जनजागरण का साहित्य है। सावित्रीबाई फुले द्वारा सर्जित साहित्य में दीन-दुखियों की पीड़ा और उससे उबरने का मार्गदर्शन भरा पड़ा है। अधिकार चेतना को उनके साहित्य की पंक्ति-पंक्ति में पिरोया हुआ है।

*सत्यशोधक समाज :----* महात्मा ज्योतिबा फुले के द्वारा सन् 1873 में गठित सत्यशोधक समाज में माता सावित्रीबाई फुले ने बहुत अहम भूमिका निभाई और महात्मा ज्योतिबा फुले के परिनिर्वाण के बाद सावित्रीबाई फुले ने सत्यशोधक समाज का सफल नेतृत्व किया।

*मनुस्मृति का विरोध :----* सत्यशोधक समाज की बैठकों में मनुस्मृति सहित ब्राह्मणवादी ग्रंथों पर खुलकर विचार-विमर्श किया जाता था और फुले दम्पति का दावा था कि आने वाले समय में लोग मनुस्मृति व ग्रंथों को कूड़ादान में फेंकेंगे या फिर जला देंगे....

*परिनिर्वाण :----* माता सावित्रीबाई फुले गरीबों की सेवा करने में दिन-रात लगे रहती थी। उस समय हैजा और प्लेग दो महामारियां हुआ करती थी। इन दोनों महामारियों से परिवार के परिवार मौत के आगोश में चले जाते थे। माता सावित्रीबाई फुले सेवा करने में जरा भी नहीं घबराती थी और और ना थकती थी। उनको रोगियों की गंदगी साफ करने में घिन नहीं आती थी। मार्च, 1897 में पुणे के इनके इलाके में प्लेग की महामारी फैल गई थी। अनेक लोग प्ले की चपेट में आ गए थे। माता सावित्रीबाई फुले ने रोगियों को बचाने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दी और दुर्भाग्यवश माता सावित्रीबाई फुले प्लेग की शिकार हो गई और *इस प्रकार महान समाजसेविका राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले का 10 मार्च, 1897 को परिनिर्वाण हो गया....*

*राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले व उनके महान योगदान को हम कोटि कोटि नमन करते हैं....🙏🙏*
डॉ जी सिंह कश्यप
प्रोफेसर पी जी कॉलेज गाजीपुर