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Wednesday, 28 January 2015

आरक्षण की आवश्यकता क्यों ?


 १३ दिसम्बर १९४६ को प. जवाहरलाल नेहरू ने संविधान निर्माण के लिए आठ सूत्रीय उद्देश्य संकलप पत्र संविधान सभा  समक्ष  विचार करने के लिए प्रस्तुत किया।  इस संकलप पत्र में प्रत्येक नागरिक को सामाजिक, आर्थिक न्याय देने के लिए देश की अर्थव्यवस्था क्या होगी तथा देश के उद्योग  एवं जमीन  का क्या होगा, कोई उल्लेख नहीं था।  इस महत्वपूर्ण बिंदु को उद्देश्य संकलप पत्र  में क्यों  नहीं शामिल किया गया ? यह भी एक विचारणीय  प्रश्न है।  उस समय ५६५ राजाओं ने राष्ट्र हित  में अपनी रियासत का परित्याग किया और  साधारण मनुष्य बनकर रहना स्वीकार किया।  इस देश के उद्योगपतियों और जमींदारो को भी राष्ट्र  हित  में अपने उधोग  और जमीन  का परित्याग करना और साधारण  बनकर रहना स्वीकार करना चाहिए था , परन्तु इन्होने ऐसा नहीं किया और इन्हे ऐसा करने के लिए बाध्य भी नहीं किया गया।  उद्देश्य संकलप पत्र  में इस महत्वपूर्ण बिंदु को शामिल न करके इन उद्योगपतियों के उद्योग और जमींदारो की जमीन   की  सुरक्षा की गयी।  यहीं  से आज़ाद भारत में आरक्षण की संकलपना का सूत्रपात  होता है।  क्योकि इस देश की ९५% भूमि ,१००% उद्योग और  नौकरियां उच्च वर्ग  के पास   है।  पिछड़ा वर्ग के पास मात्र ५% जमीन  है।  उद्योग व नौकरियां न के बराबर है।  यदि आरक्षण की संकलपना न होती तो १००% नौकरियां भी उच्च वर्ग के ही पास होती।  जमीन  अयोग्यता के आधार पर और नौकरियां योग्यता के आधार पर।  आज आरक्षण के बावजूद भी उच्च वर्ग के पास ८०% नौकरियां है। 
आखिल  भारतीय पिछड़ा वर्ग एसोसिएशन  राष्ट्रीय स्तर पिछड़ा वर्ग  (SC, ST,OBC, NT,DNT, VJNT ) एव  इनके अल्पसंख्यको को अपने अधिकारों के लिए जागरूक करने का  कार्यक्रम चला रहा है

Tuesday, 27 January 2015

ब्रह्मिनो के सुरक्षा कवच जिनका प्रयोग करके वे पुरे समाज पैर हावी रहते है

ब्रह्मिनो के सुरक्षा कवच जिनका प्रयोग करके वे पुरे समाज पैर हावी रहते है १-ऊँच-नीच ,छुआ-छूत आधारित अशंख्य जातिया - ये अपनी जाती में तो संघटित हो सकती है मगर पिछड़ा वर्ग के रूप में संघ्तिः नहीं हो सकती है २- पिछड़ा वर्ग का अपनी गरीबी को पूर्व जन्मो के कर्मो का परिणाम मानना - इसको दूर करने के लिए कोई ठोश कदम न उठाना -इससे इनकी प्रबल धरना बनी हुई है कि किसी की भी सरकार बने उसमे हमारी कोई रूचि नहीं है ३- पिछड़ा वर्ग के संपन्न एव नौकरी पेशा लोगो की उच्च वर्गों जैसी सोच - की यहाँ अमीरी गरीबी बनी रहेगी ४ -प्रगति शील उच्च वर्ग से नियंत्रित साम्यवादी और समाज वादी तथा पिछड़ा वर्ग के बहुत सारे संघटन जो अपने अहंकार के कारन पिछड़ा वर्ग के रूप में संघटित होने में अवरोध का कार्य करते है ५ राज्य सभा ६- न्यायपालिका ७ सेना

Monday, 26 January 2015

वामन अवतार के तीन पग :संरक्षण ,सत्ता और शिक्षा के अधिकारों से वंचित करना !

वामन पुराण की कहानी में विष्णु ने वामन ( बौना )के रूप में अवतार लिया था जिसमे कहा गया है कि वामन ने सश्री प्रथ्वी को तीन पग से नाप दिया था जब जघह नहीं मिली तो राजा बलि के सर पर पैर रख दिया था .साथियों कहानी का अर्थ है जिसका अर्थ हमको सही तरीके से जानना पड़ेगा जो इस प्रकार है अर्यो के आगमन से सभी परिचित है अर्यो ने इस देश में आकार अपनी पहचान बनायीं देव के रूप में ,यहाँ के मूलनिवासियो कि पहन बनायीं दानव के रूप में ,अर्यो ने अपने को कहा देव ,सुर और हमें कहा दानव असुर और देव और दानव कि लडाई शरू कर दिया और एक व्यवस्था बनाया जिसे वर्ण वयस्था नाम दिया जिसमे १-ब्रहमिन २- क्षत्रिय ,२- वैश्य ,४- शुद्र यहाँ के मूलनिवासियो को चौथे वर्ण में रखा ,और बताया ब्रहमिन का धरम पढ़ना , पढाना,क्षत्रिय का धरम ,पढना ,राज करना मगर पढाना नहीं, वैश्य का धरम खेती,व्यापर ,और पढ़ना .मगर शुद्र का धरम तीनो वर्णों कि सेवा करना बताया मगर शुद्रो के राजा बलि ने भुजाओ के बल पर अपना राज कायम किया और तीन कानून पास किये १- मेरे र्राज में वर्ण वयस्था नहीं चलेगी सब बराबर है कोई उच्च नीच नहीं होगी २- हर कोई हर काम कर सकता है २- कोई यज्ञ नहीं करेगा . ये तीनो कानून समानता स्थापित करने के लिए किये गये थे , किन्तु ब्राह्मणों ने कहा कि र्राजा बलि को अभिमान हो गया है जो भगवन कि बनायीं हुयी गैर बराबरी को नहीं मानता हम ब्रह्मिब श्रेष्ठ है और रहेंगे तो ब्राह्मणों ने अपना संघटन बनाना शरू कर दिया और राज्य के चारो और किले के रूप में यज्ञ शालाये बनाना शुरू कर दिया और षड़यंत्र के तहेत एक ब्रह्मिन को भिखारी का भेष बनाकर राजा के किर्या कलापों को जाचने के लिए दरबार में भेज दिया उसने राजा को नयाय करते देखा और उसकी बचंबद्ता को समन्झ कर उसने भी कुछ माँगा और कहा मुझे भी कुछ दे दो राजा ने कहा मांगो भिखारी ने कहा पहले बचन दो राजा बचन के पक्के थे कहा तथास्तु मंत्री ने मना था ,राजा जबान के पक्के थे भिखारी (ब्रह्मिन ) ने कहा हमें हमरी यागशाला दे दो , राजा ने कहा तथास्तू ,मंत्री से राजा ने कहा इनको इनकी यज्ञ शाला दे दो आगे आगे ब्रह्मण चला अपनी यज्ञ शाला लेने के लिए पीछे मंत्री जब एक यागशाला दिया तो मंत्री ने पूछा कितनी याग शाला है ब्रह्मण ने कहा जब राजा ने नहीं पूछा तो आप क्यों पूछ रहे हो तो आगे आगे ब्रह्मिन यागशाला लेता चलता रहा पीछे -२ ब्राह्मणों कि फ़ौज चल दी तो इस प्रकार से राजा का सरक्षण चला गया , सरक्षण के बिना सत्ता चली गयी तो सत्ता के बिना सिक्षा चली गयी तो इस प्रकार कहानी को लिखा गया कि तीन पग में धरती आकाश पाताल नाप दिया था बल्कि ये तीन पग १-सरक्षण २-सत्ता ३-शिक्षा समाप्त करना और लोगो को पता न चले कहानी ल्लिख दिया क्योकि शुद्रो को शिक्षा का अधिकार नहीं था उनकी समझ नहीं थी तब उसने लिखा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले वहा ये मंत्र बोल कर संकल्प करवाता है येंबधो बलिराजा दनेंद्रोमाहबाला ,तेंत्वाम प्रतिबंधामी माचाल्माचाल्म यानि तुम्हरे राजा बलि जो दान और वेद में महाबली थे उनको मैंने बचन बध करके गुलाम बनाया है ठीक उसी प्रकार आप को भी गुलाम बना रहा हु शांत रहो क्रमशा....... age

Friday, 16 January 2015

देश में पहला स्कूल खोलनेवाले राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीआई के कार्य अतुलनीय हैं । जहां पूरे sc,st,obc,and converted minorities को एज्युकेशन लेने का अधिकार नहीं था वहां उसकी शुरुआत कर सभी बंधनो को तोडनेवाले महात्मा फुले और सावित्रीआई विश्वरत्न हैं. सावित्रीआई के योगदान की जितनी बातें करें उतनी कम हैं. ब्राम्हणो की गालियां, उन्होनें फेके हूए पत्थर झेलकर उन्होंने अपना कार्य किया। इस कार्य की वजह से राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीआई को घर से निकाल दिया गया लेकिन फिर भी उन्होंने इसे अंजाम तक पहूँचाया. सावित्रीआई देश की पहली शिक्षिका हैं।