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Monday, 26 January 2015

वामन अवतार के तीन पग :संरक्षण ,सत्ता और शिक्षा के अधिकारों से वंचित करना !

वामन पुराण की कहानी में विष्णु ने वामन ( बौना )के रूप में अवतार लिया था जिसमे कहा गया है कि वामन ने सश्री प्रथ्वी को तीन पग से नाप दिया था जब जघह नहीं मिली तो राजा बलि के सर पर पैर रख दिया था .साथियों कहानी का अर्थ है जिसका अर्थ हमको सही तरीके से जानना पड़ेगा जो इस प्रकार है अर्यो के आगमन से सभी परिचित है अर्यो ने इस देश में आकार अपनी पहचान बनायीं देव के रूप में ,यहाँ के मूलनिवासियो कि पहन बनायीं दानव के रूप में ,अर्यो ने अपने को कहा देव ,सुर और हमें कहा दानव असुर और देव और दानव कि लडाई शरू कर दिया और एक व्यवस्था बनाया जिसे वर्ण वयस्था नाम दिया जिसमे १-ब्रहमिन २- क्षत्रिय ,२- वैश्य ,४- शुद्र यहाँ के मूलनिवासियो को चौथे वर्ण में रखा ,और बताया ब्रहमिन का धरम पढ़ना , पढाना,क्षत्रिय का धरम ,पढना ,राज करना मगर पढाना नहीं, वैश्य का धरम खेती,व्यापर ,और पढ़ना .मगर शुद्र का धरम तीनो वर्णों कि सेवा करना बताया मगर शुद्रो के राजा बलि ने भुजाओ के बल पर अपना राज कायम किया और तीन कानून पास किये १- मेरे र्राज में वर्ण वयस्था नहीं चलेगी सब बराबर है कोई उच्च नीच नहीं होगी २- हर कोई हर काम कर सकता है २- कोई यज्ञ नहीं करेगा . ये तीनो कानून समानता स्थापित करने के लिए किये गये थे , किन्तु ब्राह्मणों ने कहा कि र्राजा बलि को अभिमान हो गया है जो भगवन कि बनायीं हुयी गैर बराबरी को नहीं मानता हम ब्रह्मिब श्रेष्ठ है और रहेंगे तो ब्राह्मणों ने अपना संघटन बनाना शरू कर दिया और राज्य के चारो और किले के रूप में यज्ञ शालाये बनाना शुरू कर दिया और षड़यंत्र के तहेत एक ब्रह्मिन को भिखारी का भेष बनाकर राजा के किर्या कलापों को जाचने के लिए दरबार में भेज दिया उसने राजा को नयाय करते देखा और उसकी बचंबद्ता को समन्झ कर उसने भी कुछ माँगा और कहा मुझे भी कुछ दे दो राजा ने कहा मांगो भिखारी ने कहा पहले बचन दो राजा बचन के पक्के थे कहा तथास्तु मंत्री ने मना था ,राजा जबान के पक्के थे भिखारी (ब्रह्मिन ) ने कहा हमें हमरी यागशाला दे दो , राजा ने कहा तथास्तू ,मंत्री से राजा ने कहा इनको इनकी यज्ञ शाला दे दो आगे आगे ब्रह्मण चला अपनी यज्ञ शाला लेने के लिए पीछे मंत्री जब एक यागशाला दिया तो मंत्री ने पूछा कितनी याग शाला है ब्रह्मण ने कहा जब राजा ने नहीं पूछा तो आप क्यों पूछ रहे हो तो आगे आगे ब्रह्मिन यागशाला लेता चलता रहा पीछे -२ ब्राह्मणों कि फ़ौज चल दी तो इस प्रकार से राजा का सरक्षण चला गया , सरक्षण के बिना सत्ता चली गयी तो सत्ता के बिना सिक्षा चली गयी तो इस प्रकार कहानी को लिखा गया कि तीन पग में धरती आकाश पाताल नाप दिया था बल्कि ये तीन पग १-सरक्षण २-सत्ता ३-शिक्षा समाप्त करना और लोगो को पता न चले कहानी ल्लिख दिया क्योकि शुद्रो को शिक्षा का अधिकार नहीं था उनकी समझ नहीं थी तब उसने लिखा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले वहा ये मंत्र बोल कर संकल्प करवाता है येंबधो बलिराजा दनेंद्रोमाहबाला ,तेंत्वाम प्रतिबंधामी माचाल्माचाल्म यानि तुम्हरे राजा बलि जो दान और वेद में महाबली थे उनको मैंने बचन बध करके गुलाम बनाया है ठीक उसी प्रकार आप को भी गुलाम बना रहा हु शांत रहो क्रमशा....... age

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