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Friday, 7 November 2025

राजनीति नहीं, विचार ही असली क्रांति है: डॉ०जी० सिंह कश्यप

राजनीति नहीं, विचार ही असली क्रांति है: डॉ०जी० सिंह कश्यप



 “पद से नहीं, उद्देश्य से पहचान बनती है।”

 गाजीपुर में बाबासाहेब भीम राव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस की तैयारी हेतु कार्यक्रम के प्रचार प्रसार के दौरान आदर्श बाजार गाजीपुर  स्थित  कार्यक्रम में बताया कि आज के दौर में समाज का एक बड़ा वर्ग यह मान बैठा है कि राजनीति में ऊँचा पद पाना ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है। मंत्री, विधायक या सांसद बनने को ही सफलता की कसौटी मान लिया गया है। परंतु यह सोच हमें उस मूल दिशा से भटका रही है, जिसे डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने हमारे लिए तय किया था। बाबासाहेब ने कभी पद को लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि उन्होंने मिशन को अपना जीवन बना लिया। उनका मिशन था – सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और मानवता की स्थापना।

 बाबासाहेब का असली मिशन: मानव मुक्ति का मार्ग

बाबासाहेब अम्बेडकर का मिशन केवल राजनीति या संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था।  उनका उद्देश्य था — ऐसी समाज व्यवस्था बनाना जहाँ कोई भी व्यक्ति जाति, धर्म, लिंग या जन्म के कारण अपमानित न हो। उन्होंने तीन शब्दों में अपने मिशन की दिशा बताई थी:
👉 शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।

यह तीनों शब्द केवल नारे नहीं, बल्कि समाज के पुनर्जागरण का सूत्र हैं। उन्होंने दिखाया कि यदि समाज शिक्षित और संगठित होगा, तो वह अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़ सकेगा — किसी सत्ता या नेता पर निर्भर नहीं रहेगा।I

 राजनीति नहीं, विचार ही असली क्रांति है

आज की राजनीति “पद की भूख” और “जातीय समीकरणों” के दलदल में फँस चुकी है। ऐसी राजनीति में न नैतिकता बची है, न ही जनसेवा की भावना। बाबासाहेब ने राजनीति को कभी पद प्राप्ति का साधन नहीं माना, बल्कि उन्होंने कहा था: “राजनीति समाज सुधार का साधन है, न कि केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम।” इसलिए राजनीति की चंगाई विचार क्रांति से ही संभव है।  जब तक समाज में समानता और न्याय की भावना नहीं जागेगी, तब तक लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित रहेगा।

बहुजन युवाओं के नाम संदेश: भ्रम से बाहर निकलो

आज बहुजन युवाओं के सामने सबसे बड़ा खतरा “भ्रम” का है।  उन्हें यह विश्वास दिलाया जा रहा है कि केवल राजनीति में जाकर ही परिवर्तन संभव है। लेकिन यह आधा सच है। इतिहास साक्षी है — परिवर्तन कभी केवल सत्ता से नहीं आया, बल्कि विचार और शिक्षा से आया है।  बाबासाहेब ने खुद सत्ता की नहीं, समाज की चेतना की राजनीति की थी। उन्होंने कहा था: “मैं अपने समाज को राजा नहीं, नागरिक बनाना चाहता हूँ।” इसलिए बहुजन युवाओं का पहला कर्तव्य है — स्वयं को शिक्षित करना, अपने विचारों को मजबूत बनाना, और समाज में जागरूकता फैलाना।  जब विचारों की ताकत बढ़ेगी, तो नेतृत्व स्वतः तैयार होगा।

लोकतंत्र की सच्ची सफलता — जब समाज जागेगा

भारत का लोकतंत्र तब ही मजबूत होगा जब हर नागरिक को समान अवसर, समान शिक्षा और समान सम्मान मिलेगा। बाबासाहेब का मिशन लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत बनाता है क्योंकि यह कहता है —“जहाँ समानता नहीं, वहाँ लोकतंत्र केवल दिखावा है।” आज की राजनीति को नैतिकता और संवेदनशीलता की ज़रूरत है, और यह गुण केवल बाबासाहेब की विचारधारा से आ सकते हैं।
ल जब समाज विचारों से संगठित होगा, तो भ्रष्टाचार, जातिवाद और स्वार्थ की राजनीति अपने आप समाप्त हो जाएगी।

 निष्कर्ष: बाबासाहेब का मिशन ही असली राजनीति है

मंत्री, विधायक या एम.पी. बनना जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए,  बल्कि बाबासाहेब के मिशन को आगे बढ़ाना ही असली जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। कुर्सी क्षणिक है — पर विचार अमर हैं।  पद बदल जाते हैं — पर मिशन इतिहास रचता है। बहुजन युवाओं को यह प्रण लेना चाहिए कि वे पद नहीं, परिवर्तन की राजनीति करेंगे।
वे वोट नहीं, विचार की ताकत पर समाज उठाएँगे।

 संदेश की पंक्ति:

“राजनीति से पहले विचार चाहिए,
पद से पहले उद्देश्य चाहिए,
और जीवन से पहले मिशन चाहिए —
यही बाबासाहेब का रास्ता है।” मंत्री, विधायक या एम.पी. बनना ज़रूरी नहीं — ज़रूरी है बाबासाहेब के मिशन को तेज़ करना


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