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Thursday, 21 May 2026

समता बौद्ध विहार सरायबंदी, बिरनो गाजीपुर का भव्य उद्घाटन एवं प्रतिमा अनावरण समारोह


जनपद गाजीपुर के बिरनो क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सरायबंदी में दिनांक 18 मई 2026 को एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत भव्यता और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर “समता बौद्ध विहार, सरायबंदी” का भव्य उद्घाटन तथा स्मृतिशेष मा० जगदीश कुशवाहा शिक्षक (सेवानिवृत्त), श्री शिवकुमार शास्त्री इंटर कॉलेज जंगीपुर एवं स्मृतिशेष इमिरती देवी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम प्रातः 10 बजे आरम्भ हुआ, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, बौद्ध भिक्षुओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

यह कार्यक्रम केवल एक भवन के उद्घाटन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सामाजिक समता, बौद्ध संस्कृति, शिक्षा, मानवीय मूल्यों तथा समाज में भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन सिद्ध हुआ। पूरे क्षेत्र में इस कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारम्भ फीता काटकर किया गया। उद्घाटन का यह पावन कार्य पीजी कॉलेज गाजीपुर के प्रतिष्ठित प्रोफेसर एवं आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) जी. सिंह कश्यप तथा लोकतंत्र रक्षक सेनानी माननीय चंद्रिका प्रसाद सिंह पटेल द्वारा संयुक्त रूप से सम्पन्न किया गया। उद्घाटन के समय उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अतिथियों का स्वागत किया। इसके उपरांत भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।

कार्यक्रम में पीजी कॉलेज गाजीपुर के प्रोफेसर (डॉ.) जी. सिंह कश्यप ने अपने उद्बोधन में पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने आदरणीय चंद्रिका प्रसाद सिंह पटेल जी राजकुमार सिंह कुशवाहा,डॉ शिव गोविंद सिंह कुशवाहा तथा स्मृतिशेष जगदीश सिंह कुशवाहा जी के साथ मिलकर अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग एसोसिएशन की स्थापना की थी। उन्होंने उन संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए कहा कि समाज को संगठित करना और उसे शिक्षा एवं जागरूकता की दिशा में आगे बढ़ाना उस समय भी एक बड़ी चुनौती थी, किन्तु समाज के प्रति समर्पण और सत्य के प्रति निष्ठा ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि जगदीश सिंह कुशवाहा जी के परिवार में जब भी उनका आना-जाना होता था, तब समाज में फैल रहे पाखंड, अंधविश्वास और बेकार रीति-रिवाजों को लेकर गंभीर चर्चा हुआ करती थी। उस समय यह चिंता व्यक्त की जाती थी कि समाज सत्य के मार्ग से भटकता जा रहा है और लोग प्रमाण के बजाय केवल परंपराओं और अंधविश्वासों पर विश्वास करने लगे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की महान कृति का उल्लेख किया, जिसमें तथागत गौतम बुद्ध के दर्शन के अनुसार सत्य को स्वीकार करने के लिए प्रमाण की आवश्यकता बताई गई है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के विचारों में प्रमाण दो प्रकार के बताए गए हैं—पहला प्रत्यक्ष प्रमाण, जिसे व्यक्ति स्वयं अनुभव करता है; और दूसरा अप्रत्यक्ष प्रमाण, जिसे सुनकर या अन्य माध्यमों से जाना जाता है। बुद्ध का दर्शन व्यक्ति को विवेक, तर्क और अनुभव के आधार पर सत्य को स्वीकार करने की प्रेरणा देता है। डॉ. जी. सिंह कश्यप ने कहा कि जगदीश सिंह कुशवाहा जी इन विचारों को बहुत पहले से अपने जीवन में आत्मसात कर चुके थे। वे तथागत गौतम बुद्ध के विचारों से अत्यंत प्रभावित थे और समाज को मानवता, सत्य तथा विवेक की दिशा में आगे ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते थे।

उन्होंने कहा कि जगदीश सिंह कुशवाहा जी बार-बार यह बात कहते थे कि समाज को पाखंड और अंधविश्वास से बाहर निकालने के लिए शिक्षित नेतृत्व की आवश्यकता है। वे युवाओं से कहा करते थे कि समाज की दहलीज पर खड़े होकर सत्य की राह देखने वाले लोग ही वास्तव में परिवर्तन के वाहक बनते हैं। उनका मानना था कि शिक्षा और जागरूकता ही समाज को नई दिशा दे सकती है। इसी भावना को आगे बढ़ाने के लिए समता बौद्ध विहार की स्थापना की गई है।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि मानवता ही वास्तविक धर्म है। तथागत बुद्ध के विचारों के अनुरूप समाज को उन कुरीतियों और रूढ़ियों से मुक्त होना होगा जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करती हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित होगी और वही भविष्य में समाज के परिवर्तन का आधार बनेंगे।

इस अवसर पर समता बौद्ध विहार की स्थापना के प्रमुख आयोजकों—माननीय रामवचन सिंह कुशवाहा, रामविलास सिंह कुशवाहा एवं अरविंद सिंह कुशवाहा—का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन तीनों भाइयों ने अपने पिता स्वर्गीय जगदीश सिंह कुशवाहा जी के अधूरे सपनों को साकार करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। जीवनकाल में जो सपना पूरा नहीं हो सका, उसे आज उनके पुत्रों ने मूर्त रूप देकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

वक्ताओं ने कहा कि यह बौद्ध विहार केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक चेतना का केंद्र बनेगा। यहाँ से युवाओं को सत्य, समता और मानवता का संदेश मिलेगा। यह स्थान सदियों तक समाज को प्रेरित करता रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय जगदीश सिंह कुशवाहा जी एवं स्मृतिशेष इमिरती देवी की स्मृति में स्थापित प्रतिमाओं का अनावरण किया गया। इन प्रतिमाओं को देखकर उपस्थित लोगों की स्मृतियाँ ताजा हो उठीं। लोगों ने उनके जीवन, संघर्ष, समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। वक्ताओं ने कहा कि यह स्मृति शिल्प आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों और व्यक्तित्व से प्रेरणा देता रहेगा।

डॉ. जी. सिंह कश्यप ने कहा कि जगदीश सिंह कुशवाहा जी ने अपने जीवन में जो मानक स्थापित किए थे, वही आज उनके बच्चों के कार्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा, नैतिकता और समाज सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया और उसी विचारधारा को आज उनके परिवार द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। सभा में उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनके योगदान का सम्मान किया।

कार्यक्रम में तथागत गौतम बुद्ध के विचारों के आधार पर “श्रेष्ठ मनुष्य” के लक्षणों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इस संसार में चार प्रकार के लोग होते हैं। पहला वह जो केवल अपना भला करता है, दूसरों का नहीं; दूसरा वह जो दूसरों का भला करता है पर अपना नहीं; तीसरा वह जो न अपना भला करता है और न दूसरों का; तथा चौथा वह जो अपना भी भला करता है और दूसरों का भी भला करता है। यही चौथा प्रकार समाज के लिए सबसे उपयोगी और प्रेरणादायक माना गया है।

वक्ताओं ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी उन्नति के साथ-साथ दूसरों की उन्नति के लिए भी प्रयास करता है, ज्ञान प्राप्त करके उसे समाज में बाँटता है, वही वास्तविक अर्थों में नेतृत्वकर्ता होता है। जगदीश सिंह कुशवाहा जी का जीवन इसी आदर्श का उदाहरण था। उन्होंने समाज को जागरूक करने, शिक्षा फैलाने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने का कार्य किया।

सभा में यह भी कहा गया कि तथागत बुद्ध और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का संगम ही वास्तविक सामाजिक परिवर्तन का आधार है। बुद्ध ने सत्य, करुणा और विवेक का मार्ग दिखाया, जबकि बाबा साहब ने शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से समाज को नई चेतना प्रदान की। समता बौद्ध विहार इन्हीं विचारों का जीवंत प्रतीक बनकर स्थापित हुआ है।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समता बौद्ध विहार को एक शिक्षा-केंद्रित संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ युवाओं को मार्गदर्शन, प्रेरणा और नेतृत्व प्रशिक्षण के अवसर प्राप्त होंगे। समाज में सत्य और शिक्षा के समन्वय से व्यापक सामाजिक परिवर्तन लाने की दिशा में निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया गया।

सभा में उपस्थित सभी लोगों ने स्वर्गीय जगदीश सिंह कुशवाहा जी के आदर्शों को आगे बढ़ाने तथा समाज में शिक्षा, समता और मानवता के मूल्यों को स्थापित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत भावुक, प्रेरणादायक और ऊर्जा से भरपूर रहा।

अंत में सभी ने एक स्वर में तथागत बुद्ध, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा समाज सुधारकों के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया और कहा कि शिक्षा से नेतृत्व तथा नेतृत्व से समाज का निर्माण संभव है। 

समारोह में उपस्थित भंते जी एवं श्रद्धालुओं द्वारा बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील का सामूहिक पाठ किया गया। पूरे वातावरण में बौद्ध धम्म की मधुर ध्वनि गूंज उठी, जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से भर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने भगवान बुद्ध के बताए करुणा, अहिंसा, समानता और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह क्षण अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।

इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित बौद्ध भिक्षुओं का आगमन हुआ, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भन्ते धम्मसरण जी (बुद्ध विहार देवकली, गाजीपुर), भन्ते प्रज्ञादीप जी (सम्यक स्टोन मार्केट, कैमूर बिहार), भन्ते बुद्धशरण जी (बुद्ध विहार छावनी लाइन, गाजीपुर), भन्ते एस. गौतम जी (जंगीपुर बाजार, गाजीपुर) तथा भन्ते वीरभद्र जी (अम्बेडकर बुद्ध विहार, लंका गाजीपुर) उपस्थित रहे। सभी भंतेजियों ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधनों में भगवान बुद्ध के विचारों को अपनाने तथा समाज में समता, शिक्षा और नैतिकता के प्रसार पर बल दिया।

लोकतंत्र रक्षक सेनानी व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग एसोसिएशन एवं सेवानिवृत्त शिक्षक माननीय चंद्रिका प्रसाद सिंह पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में भाईचारा, समानता और न्याय स्थापित करने के लिए भगवान बुद्ध के विचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने आयोजकों को इस महान कार्य के लिए बधाई दी तथा कहा कि यह विहार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

 मा० डॉ० शिवगोबिंद कुशवाहा, मंडल प्रभारी SAC वाराणसी एवं सहायक संपादक “सामाजिक क्रांति की ओर” पिछड़ा वर्ग पत्रिका ने अपने संबोधन में सामाजिक चेतना और संगठन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज को शिक्षित, संगठित और जागरूक बनाकर ही सामाजिक परिवर्तन संभव है। उन्होंने समता बौद्ध विहार को सामाजिक जागरण का केंद्र बताया।

कार्यक्रम में मा० राजकुमार सिंह कुशवाहा, जिला महासचिव SAC टीम गाजीपुर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समाज के महान व्यक्तित्वों की स्मृति में ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने युवाओं से समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

इस अवसर पर प्रसिद्ध कवियों और बौद्धाचार्यों ने भी अपने विचार एवं काव्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को अत्यंत भावपूर्ण बना दिया। जयराम कवि बौद्धाचार्य, विमल कवि एवं कवि रामनाथ कुशवाहा ने बुद्ध, समता, मानवता और सामाजिक एकता पर आधारित कविताओं एवं गीतों की प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित लोगों ने अत्यंत सराहा। कवियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण का सुंदर समन्वय स्थापित किया।

कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, धम्म उपासक एवं उपासिकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। सभी लोगों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए आयोजकों की प्रशंसा की और समता बौद्ध विहार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के मुख्य आयोजक स्मृतिशेष जगदीश सिंह कुशवाहा के तीनों सुपुत्र — माननीय रामबचन सिंह कुशवाहा, रामबिलास सिंह कुशवाहा एवं अरविंद सिंह कुशवाहा रहे। तीनों भाइयों ने अपने माता-पिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाने तथा समाज में बौद्ध धम्म एवं सामाजिक समता के संदेश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस भव्य आयोजन का सफल संचालन किया। आयोजन की व्यवस्थाएं अत्यंत सुव्यवस्थित एवं अनुकरणीय रहीं। अतिथियों के स्वागत, बैठने की व्यवस्था, भोजन एवं अन्य सभी व्यवस्थाओं में आयोजकों की मेहनत और समर्पण स्पष्ट दिखाई दिया।

समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने स्मृतिशेष मा० जगदीश कुशवाहा एवं स्मृतिशेष इमिरती देवी के चित्रों एवं प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। लोगों ने उनके सामाजिक योगदान, शिक्षा के प्रति समर्पण और मानवीय मूल्यों को याद किया। ग्रामीणों एवं क्षेत्रीय लोगों ने कहा कि उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव समाज को प्रेरित करते रहेंगे।

समता बौद्ध विहार का निर्माण क्षेत्र में सामाजिक एवं आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह विहार न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा, बल्कि शिक्षा, नैतिकता, सामाजिक समरसता एवं बौद्ध संस्कृति के प्रचार-प्रसार का माध्यम भी बनेगा। ग्रामीणों में इस विहार को लेकर विशेष उत्साह एवं श्रद्धा देखने को मिली।

कार्यक्रम का समापन मंगलकामना एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज में प्रेम, करुणा, समानता और भाईचारे का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन ने समाज को एक नई दिशा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की।

निश्चित रूप से, समता बौद्ध विहार सरायबंदी, बिरनो गाजीपुर का यह उद्घाटन समारोह सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत ऐतिहासिक और प्रेरणादायी रहा। यह आयोजन आने वाले समय में समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा तथा समता, शिक्षा और मानवता के संदेश को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा।


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