लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी की चौथी पुण्यतिथि 12 अक्टूबर 20217 को गाँव लहरीपुर मे मनाई गई इस अवसर पर बोलते हुए बी०एल० मेहरा जी ने कहा कि संत लहरी सिंह जी हमेशा कहते थे कि जीवन और जागरूकता एक दूसरे के पूरक है। अनुभव, अवसरों, परिस्थितियों एवं संघर्षों की अनवरत यात्रा ही जीवन है। इस सतत यात्रा में जागरूकता ऐसी शक्ति है, जो हमें बाह्य जगत की वास्तविकता से परिचित कराती है। जागरूकता की शक्ति ही हमें अपने अंतर्मन से भी जोड़ती है। जागरूकता का अर्थ है-किसी भी विषय के प्रति सजगता एवं सतर्कता का परिचय देते हुए हुए अधिकतम ज्ञानार्जन का प्रयास करना। वास्तव में जागरूकता एक विस्तृत एवं गहन अवधारणा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के प्रत्येक स्तर पर हमें जागरूकत्य की आवश्यकता पड़ती है। ऐसा माना जाता है कि प्रकृति ने केवल मनुष्य को ही सोच, विचार, तर्क-वितर्क एवं आत्ममंथन की शक्ति से संपन्न बनाया है। जागरूकता का संबंध केवल हमारी बाहरी इंद्रियों से ही नहीं है, अपितु हमारी भावनाओं, विचारों एवं कल्पनाशक्ति का भी जागरूकता के साथ एक नितांत गहरा संबंध है। जीवन की सार्थकता तभी सिद्ध हो सकती है जब हम इसे जागरूकता के साथ जीने का प्रयास करें। जागरूकता को अपनी दिनचर्या में समावेशित करके हम जीवन की अनंत गहराइयों में उतरकर इसके वास्तविक मर्म को समझने में सफल हो सकते हैं। मैं भी इस बात की पुष्टि करता हू कि सही अर्थों में जीवन और जागरूकता एक दूसरे के पूरक हैं। किसी भी विषय के प्रति जागरूकता उस विषय में हमारी समझ को विकसित एवं उन्नत बनाने में सहायता करती है। उदाहरण के लिए, यदि हम स्वयं के प्रति जागरूक हों, तो हम निश्चित रूप से आत्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होंगे। यदि हम समाज एवं राष्ट्र के प्रति जागरूक हैं, तो निश्चित ही हम उसकी प्रगति में अपना अमूल्य योगदान कर सकेंगे। यदि हम अध्यात्म के प्रति जागरूक हैं, तो यह जागरूकता ईश्वर से जुड़ने में हमारी मदद करेगी। जहां एक ओर जागरूकता का अभाव जीवन में अनेक समस्याओं को जन्म देता है नहीं जागरुकतामय जीवन सफलता के सोपान पर अग्रसर करता है
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